About Me

I love life, and am proud to be the most wonderful creation of God. You got it, "HUMAN BEING". Had I been a flower, fish or a bird, I must not been writing this......

Monday, January 31, 2011

अतीत का रंग

आज बहुत दिन बाद
जब कमरा खोला
तो देखा कुछ 
उथल-पुथल मची हुई थी

कुछ धूल, कुछ शोर
और कुछ पुरानी बातें
बिखरी हुई थी

मेरी नज़र गयी 
उस एक कोने पे जो खली था
एक लम्हा 
नज़र झुकाए बैठा हुआ था

उसने जो 
मेरी ओर नज़र उठाई
तो माज़ी के
कुछ लम्हों की चीखें सुनाई दीं

मैंने उस लम्हे को बरसों पहले 
इस कमरे में कैद किया था
और सफ़ेद चादर से 
ढक दिया था

आज भी वो लम्हा
वहीं था
बस चादर का रंग 
कुछ सुर्ख लाल पड़ चुका था........

written on: Jan 30th 2011