Friday, August 17, 2012

Delicacy of Emotions

Delicacy of emotions,
Marinated in syrup of words,
Whisked with sweet nothings,
Mixed with tangy mischief,
Baked over warmth of our breaths,
Garnished with sour memories,
Laced with shimmer of smiles
Spread on the pan of Life,

Ah!! my friend or foe
I savour the taste of
our relationship!!

Wednesday, August 08, 2012

झूला

तुम बस इतना कर दो,
नीम के पेड़ की
सबसे ऊँची डाल जो है,
उस पर एक झूला डाल दो.
वही नीम का पेड़ जो,
सावन में मेरी खिड़की के अन्दर झांकता था,
जिसकी मीठी निम्बोरी मेरे आँगन में बिखरी रहती थीं,
बहुत आँख दिखाई है मैंने उसे,
पतझड़ के मौसम में.

तुम बस इतना कर दो,
नीम के पेड़ की
सबसे ऊँची डाल जो है,
उस पर एक झूला डाल दो.
बादल का छल्ला बना कर,
ज़रा उंगली में पेहन लूँ,
बहुत बार एड़ियों से धक्का दिया है आसमान को,
झूले पर उचक कर बैठे हुए.

तुम बस इतना कर दो,
नीम के पेड़ की
सबसे ऊँची डाल जो है,
उस पर एक झूला डाल दो......