Friday, February 08, 2013

क्या कुछ याद है तुम्हे


यादों की बूंदों से,
हर दिन भिगोते हैं खुद को जब,
...............क्या कुछ याद आता है तुम्हे?

आड़ी तिरछी लकीरों से,
नगमें लिखते हैं जब,
..............क्या कुछ याद आता है तुम्हे?

तस्वीरों से नहीं,
आईने में देख कर, तुमसे बातें करते हैं जब,
...............क्या कुछ याद आता है तुम्हे?

सिवई जैसी,
छोटी-छोटी सांसें भरतें हैं जब,
...............क्या कुछ याद आता है तुम्हे?

पैचवर्क के तकिये में,
मुंह छुपाते हैं जब,
...............क्या कुछ याद आता है तुम्हे?

लच्छेदार बातों के बीच,
गोल-गोल रोटी की लोई घुमाते हैं जब,
...............क्या कुछ याद आता है तुम्हे?

रहने दो वो मज़ाक की बातें,
ज़िन्दगी मज़ाक बन गयी है अब,
कुछ याद नहीं आता है तुम्हें .........

Friday, February 01, 2013

Love Seasons

Chills of loneliness were in my spine,
Longed for you as I whined…

A glimpse of you made the ice break,
Spring of bliss came, as moves on me you make…

Heat of romance flourished as we close,
Sweat of raging emotions was all we chose……

The drops of love you showered on me,
Drenching me in passion, from top to knee…

Fall of unfathomable bonding came to an end,
Garden of my feelings crumbled beyond mend….

O Sun! this is an end of one more cycle.
Come again, with your majesty smile.
I will shrivel up till I see you again
We made promise of happiness n pain…