Wednesday, May 28, 2014

कुछ नयापन लाओ

कुछ नयापन लाओ.… जाने क्यों दरिया जैसे सरकते रहते हो
कुछ नयापन लाओ.… ज़रा तूफ़ान के जैसे उछलोगरजो, आँखें दिखाओ। 

कुछ नयापन लाओ.… जाने क्यों अँधेरे  हालात में दिल जलाते हो
कुछ नयापन लाओ.… ज़रा नए सूरज से काजल चुराओ, आखें चमकाओ। 

कुछ नयापन लाओ.… जाने क्यों बुढ़िया की गठरी में दो सिक्कों जैसे छुपते हो
कुछ नयापन लाओ.… ज़रा सोने- चांदी की गिन्नी खनकाओ। 

कुछ नयापन लाओ.… जाने क्यों शराफत की चादर लपेटे हो
कुछ नयापन लाओ.… कुछ  बड़ी, नयी, शातिर तरकीब दिखलाओ।  

कुछ नयापन लाओ.… जैसे हो उतना बने रहने में क्या है
कुछ नयापन लाओ.… ज़रा कायदे की हदें पार करो, रॉबिनहुड बन जाओ।