Monday, July 27, 2015

जब खुद से ही ये दिल डर जाए......

किस कोने  में छुप जाएँ,  जब खुद से ही ये दिल डर जाए.…। 

कहने को तो बहुत कुछ है यहाँ, कहकहों में गुज़रती है शामें हमारी,
सन्नाटों में जब आवाज़ आती है तो, बस इक बार दिख जाए झलक तुम्हारी.…। 
किस कोने  में छुप जाएँ …… 

तुम नहीं हो तो अच्छा है ये, हमको फिक्र नहीं होती हमारी,
तुम जो आ जाते हो ख़्वाबों में भी तो, बस के निकल जाए जान हमारी .…। 
किस कोने  में छुप जाएँ .......  

ख़ुदा का वास्ता हमें, हम से नहीं दुश्मनी हमारी, 
जब होता है सामना उनसे, खामोश हमसे रहा न जाए.…। 
किस कोने  में छुप जाएँ, जब खुद से ही ये दिल डर जाए.…

Friday, July 24, 2015

कितने आते हैं, कितने जाते हैं.…

कितने आते हैं, कितने जाते हैं,
कारवां चलते चले जाते हैं, 
कुछ न कहना, कुछ न सुनना,
बस दिल के रिश्ते बुनते रहना।

कुछ तुम सुनाओ उस कच्चे मकान की,
कुछ हम बतायें उन चीटियों की क़तार की,
कहीं तो आज भी रोशन होंगे वो चिराग़,
कहीं तो आज भी  उठती होगी चूल्हे की आग। 
कितने आते हैं, कितने जाते हैं.…

इमली के दाने, कच्ची निम्बोरी,
छोटी सी साइकिल, आमों की बोरी, 
कहीं तो आज भी क़ैद होगी खुशबू  इनकी, 
किसी दिल में रोशन होगी जुस्तजू इनकी। 
कितने आते हैं, कितने जाते हैं.…

Thursday, July 23, 2015

कुछ तो मेरे साथ चला आया है

कुछ  तो मेरे साथ  चला आया है,
बस तेरा ख़याल चला आया है. 

गरमी की जब धूप झुलसाती है,
बस माँ तेरा आँचल लहराता आया है. 

calendar की  कुछ तारीखें  ऐसी  हैं,
अकेले हो कर भी हमने जश्न मनाया  है. 
(context: independence days, Republic day, indian fests)

अखबारों में जब भी तेरा नाम आया है,
हमको कभी गुस्सा, तो कभी बहुत प्यार आया है. 
(News about crime and mars missions in india)

मेरे साथ मेरा दिल भी चला आया है,
दिल में एक छोटा सा देश चला आया है,
देश की सब जानी पहचानी शक्लें-सूरत, रस्म-ओ-रवात,
सब कुछ है दूर कहीं, बस मैं ही दूर चला आया हूँ .……………