Delicacy of emotions,
Marinated in syrup of words,
Whisked with sweet nothings,
Mixed with tangy mischief,
Baked over warmth of our breaths,
Garnished with sour memories,
Laced with shimmer of smiles
Spread on the pan of Life,
Ah!! my friend or foe
I savour the taste of
our relationship!!
This page is the reflection of my poetic side!! Here is the collection of words, which helps me explaining "me" and getting more closer to my "ANTARAAGNI"
Friday, August 17, 2012
Wednesday, August 08, 2012
झूला
तुम बस इतना कर दो,
नीम के पेड़ की
सबसे ऊँची डाल जो है,
उस पर एक झूला डाल दो.
वही नीम का पेड़ जो,
सावन में मेरी खिड़की के अन्दर झांकता था,
जिसकी मीठी निम्बोरी मेरे आँगन में बिखरी रहती थीं,
बहुत आँख दिखाई है मैंने उसे,
पतझड़ के मौसम में.
तुम बस इतना कर दो,
नीम के पेड़ की
सबसे ऊँची डाल जो है,
उस पर एक झूला डाल दो.
बादल का छल्ला बना कर,
ज़रा उंगली में पेहन लूँ,
बहुत बार एड़ियों से धक्का दिया है आसमान को,
झूले पर उचक कर बैठे हुए.
तुम बस इतना कर दो,
नीम के पेड़ की
सबसे ऊँची डाल जो है,
उस पर एक झूला डाल दो......
नीम के पेड़ की
सबसे ऊँची डाल जो है,
उस पर एक झूला डाल दो.
वही नीम का पेड़ जो,
सावन में मेरी खिड़की के अन्दर झांकता था,
जिसकी मीठी निम्बोरी मेरे आँगन में बिखरी रहती थीं,
बहुत आँख दिखाई है मैंने उसे,
पतझड़ के मौसम में.
तुम बस इतना कर दो,
नीम के पेड़ की
सबसे ऊँची डाल जो है,
उस पर एक झूला डाल दो.
बादल का छल्ला बना कर,
ज़रा उंगली में पेहन लूँ,
बहुत बार एड़ियों से धक्का दिया है आसमान को,
झूले पर उचक कर बैठे हुए.
तुम बस इतना कर दो,
नीम के पेड़ की
सबसे ऊँची डाल जो है,
उस पर एक झूला डाल दो......
Wednesday, July 18, 2012
मुख़तसर
बातों का सिलसिला जारी रहा...
वो ही मिलने की बेकरारी,
वो ही बातों की खुमारी..
वो ही बेइन्तेहा मुहब्बत का इकरार,
और सुर्ख यादों की चादर पे तेरा इंतज़ार..
तुझको ढूंढा नहीं है यादों में,
तुझको पाया है सिर्फ आंसुओं में...
फर्क सिर्फ इतना है की
अब....
बातों का सिलसिला,
सिर्फ खुद से ही जारी है
Tuesday, July 17, 2012
Continuity
When dreams corrode, Life rots,
When Life rot, happiness withers,
When happiness wither, moments shrivel
When moments shrivel, death is inevitable...
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