Tuesday, May 16, 2006

खुदा-हाफिज़

लोग जाते हैं, यादें रह जातीं हैं,
इन यादों को दिल में बसा लिजिये.

आखों के ये आंसू, तस्वीर हैं हमारी,
पलकों पे इनको सजा लिजिये.

कदम-दर-कदम आप याद आयेंगे,
कदमों को हमारे नई दिशा दीजिये.

किस्मत को था इतना ही साथ मंज़ूर,
मुस्कुराते हुए अब विदा दीजिये.

No comments: