अंजान से रास्ते पे, बढ़ चले हैं कदम,
हर तरफ अजनबीयों से घिरे हुए हैं हम.
रंग मिट्टी का ही नहीं, आसमान का भी बदला है,
हर चेहरे में जाना सा कोई चेहरा आँखों ने बनाया है.
पर फिर भी सुकून है दिल को, इस बदले हुए आसमान को देख कर,
मेरी खिड़की से दिखता वो तारा, यहाँ भी मेरे साथ चला आया है!!!
written on: Feb 28th 2011
हर तरफ अजनबीयों से घिरे हुए हैं हम.
रंग मिट्टी का ही नहीं, आसमान का भी बदला है,
हर चेहरे में जाना सा कोई चेहरा आँखों ने बनाया है.
पर फिर भी सुकून है दिल को, इस बदले हुए आसमान को देख कर,
मेरी खिड़की से दिखता वो तारा, यहाँ भी मेरे साथ चला आया है!!!
written on: Feb 28th 2011
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