बातों का सिलसिला जारी रहा...
वो ही मिलने की बेकरारी,
वो ही बातों की खुमारी..
वो ही बेइन्तेहा मुहब्बत का इकरार,
और सुर्ख यादों की चादर पे तेरा इंतज़ार..
तुझको ढूंढा नहीं है यादों में,
तुझको पाया है सिर्फ आंसुओं में...
फर्क सिर्फ इतना है की
अब....
बातों का सिलसिला,
सिर्फ खुद से ही जारी है
1 comment:
ओह..
समग्र गत्यात्मक ज्योतिष
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