Friday, February 03, 2023

ज़िंदा हो?

ज़िंदा हो, तो ज़िन्दगी की रोशनी की तलाश करो,
मुर्दे कभी सवेरा देखा नहीं करते

ज़िंदा हो, तो सपनों की आग को महसूस करो,
आंच वह अलग हो जो समशान में जला करती है 

ज़िंदा हो, तो बदहवासी के जूनून से गुज़र जाओ,
बुत भी कभी आसमान छू पाते हैं भला 

ज़िंदा हो, तो लड़ जाओ इस ज़माने से,
भिड़े वह भी कभी थे जो आज दफ़्न हैं बाज़ारों में 

धुआँ उठेगा तो बस राख रह जायेगी,
सभी को गुज़रना है इस मुक़ाम से इक दिन.....   

written on: 15.01.2023

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