Friday, February 03, 2023

अदला बदली

 मेरी ड्रॉवर में सब क़रीने से जमा था, जाने कैसे उथल पुथल हो गया है सब......  


म्युनिक-मुंबई, बेंगलोर-बेरलीन, सड़क-स्ट्रासे, सब अदल बदल से गए हैं. 

कुछ नामों में ज़ंग लगा है, 

प्रेम, निराला, नंदन, नीरज, काका, बच्चन, मोरादाबादी,


चमक नहीं है इन नामो में, दोस्ती भी इनसे टूट गयी है 

मेरी ड्रॉवर में सब क़रीने से जमा था, जाने कैसे उथल पुथल हो गया है सब......  


सुन्दर सा एक स्टैंड रखा था, जिस पर मैंने खूब सजाई 

आदर्श, सोच और ईमान की ट्रॉफी 

कुछ टूट गयी, कुछ बिखर गयी, कुछ साबुत बची हुई हैं बाकी 

मेरी ड्रॉवर में सब क़रीने से जमा था, जाने कैसे उथल पुथल हो गया है सब......  


पर कुछ दिलचस्प दोस्त बने हैं 

रूमी, निएत्ज़्स्चे,गोएथे, मोज़ार्ट,  

शम्स, काफ़का, युंग, और बिस्मार्क 

जमाना है इनको अपने अपने खाँचो में अभी

डर है कहीं वक़्त के झटके, इन्हें भी न हिला दें 

मेरी ड्रॉवर में सब क़रीने से जमा रहना चाहिए  

written on: 27.01.2023

No comments: