This page is the reflection of my poetic side!! Here is the collection of words, which helps me explaining "me" and getting more closer to my "ANTARAAGNI"
Friday, August 19, 2011
Tuesday, June 07, 2011
बूँदें
पानी के आइने में वो आसमान से झाकता नज़र आया,
मेरी खिड़की से मेरे लॉन की सुखी घास पे सोता नज़र आया,
और हमें पता था की चहरे बदलना सिर्फ चाँद को आता है|
कुछ पत्ते जो शाख से टूट कर हवा के साथ बह चले,
तो लगा की दोस्ती का फ़र्ज़ निबा रहे हैं,
कुछ यादें उम्र भर लम्हों का साथ नहीं छोड़तीं|
रात जो बुझा दी मैंने,
यादें भी राख में दफ्न हो गयीं,
न जाने इस सयियारे ने ये बर्फ की चादर क्यूँ ओढ़ ली|
एक एक ब्रुश का स्ट्रोक याद था मुझे,
तुमने बड़े जतन से उस में रंग भरा था,
पानी ही तो था आँख का, न जाने कब कैनवास गीला कर गया|
written on: April 17th 2011
मेरी खिड़की से मेरे लॉन की सुखी घास पे सोता नज़र आया,
और हमें पता था की चहरे बदलना सिर्फ चाँद को आता है|
कुछ पत्ते जो शाख से टूट कर हवा के साथ बह चले,
तो लगा की दोस्ती का फ़र्ज़ निबा रहे हैं,
कुछ यादें उम्र भर लम्हों का साथ नहीं छोड़तीं|
रात जो बुझा दी मैंने,
यादें भी राख में दफ्न हो गयीं,
न जाने इस सयियारे ने ये बर्फ की चादर क्यूँ ओढ़ ली|
एक एक ब्रुश का स्ट्रोक याद था मुझे,
तुमने बड़े जतन से उस में रंग भरा था,
पानी ही तो था आँख का, न जाने कब कैनवास गीला कर गया|
written on: April 17th 2011
Inspired by Gulzar Sahab
In Triveni style-
"Triveni" is a form of Hindi/Urdu poetry initiated by the Gulzar Sahab. Unlike sher, a triveni consists of three misras. The first two are complete in themselves, but the addition of the third misra gives a new dimension all together.
written on: Mar 23th 2011
चंद भूले हुए से नाम जो याद आ जाएँ
तो जी भर सा जाता है
जुबान कभी दाँत से कट भी जाया करती है !!--------------------
"Triveni" is a form of Hindi/Urdu poetry initiated by the Gulzar Sahab. Unlike sher, a triveni consists of three misras. The first two are complete in themselves, but the addition of the third misra gives a new dimension all together.
written on: Mar 23th 2011
वोह जब याद आये, बहुत याद आये
अंजान से रास्ते पे, बढ़ चले हैं कदम,
हर तरफ अजनबीयों से घिरे हुए हैं हम.
रंग मिट्टी का ही नहीं, आसमान का भी बदला है,
हर चेहरे में जाना सा कोई चेहरा आँखों ने बनाया है.
पर फिर भी सुकून है दिल को, इस बदले हुए आसमान को देख कर,
मेरी खिड़की से दिखता वो तारा, यहाँ भी मेरे साथ चला आया है!!!
written on: Feb 28th 2011
हर तरफ अजनबीयों से घिरे हुए हैं हम.
रंग मिट्टी का ही नहीं, आसमान का भी बदला है,
हर चेहरे में जाना सा कोई चेहरा आँखों ने बनाया है.
पर फिर भी सुकून है दिल को, इस बदले हुए आसमान को देख कर,
मेरी खिड़की से दिखता वो तारा, यहाँ भी मेरे साथ चला आया है!!!
written on: Feb 28th 2011
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