Wednesday, July 18, 2012

मुख़तसर

बातों का सिलसिला जारी रहा... 
वो ही मिलने की बेकरारी,
वो ही बातों की खुमारी..
वो ही बेइन्तेहा मुहब्बत का इकरार,
और सुर्ख यादों की चादर पे तेरा इंतज़ार..
 तुझको ढूंढा नहीं है यादों में,
तुझको पाया है सिर्फ आंसुओं में...
फर्क सिर्फ इतना है की
अब.... 
बातों का सिलसिला, 
सिर्फ खुद से ही जारी है 

Tuesday, July 17, 2012

Continuity


When dreams corrode, Life rots,
When Life rot, happiness withers,
When happiness wither, moments shrivel
When moments shrivel, death is inevitable...

Tuesday, June 12, 2012

Desire



All day long,
I could see you.

As you left, 
butterflies went back in cocoon.

I gaze you from far, 
your beauty,
as seductive as ever.

Never have I told you, 
the quantity,
surely, the sea is less than my love.

Moments slipped,
as you went away.
Love sublimed.
Memories vanished.

All I have is,
Longing for you!!!


Wednesday, March 21, 2012

दुलार

कभी मोर की,
कभी खरगोश की,
रोटी बनाती थीं,
माँ! तुम कितना मुझे बहलाती थीं.

नींद में
प्यार से निवाले खिलातीं थीं
माँ! तुम कितना मुझे बहलाती थीं.

छुपन-छुपाई के खेल में,
अपने आँचल में छुपा लेती थीं,
माँ! तुम कितना मुझे बहलाती थीं.

जब पक जाते थे मेरे कान,
सोने के बुन्दों से,
चंदा कह के,
चांदी की बाली पहनाती थीं,
माँ! तुम कितना मुझे बहलाती थीं.

मोम से,
अपनी फटी एड़ियाँ भरती थीं,
लेकिन,
मेरे चहरे पे मलाई लगाती थीं,
माँ! तुम कितना मुझे बहलाती थीं.

जब बुरे सपने से उचटती थी नींद मेरी,
मुट्ठी के नमक से मेरा डर घुलवाती थीं,
माँ! तुम कितना मुझे बहलाती थीं.

कहते सुना था मैंने तुमको,
सुबह के सपने सच होते हैं,
मैंने देखा खुदको तुम्हारे आँचल में दुबके, 
माँ! क्या अब भी बहलाती हो मुझको ?